देश का आधा काम सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से ही होता है :- नरेंद्र मेहता

पिछले कुछ वर्षों के दौरान मुंबई के उपनगरों में मीरा-भाईंदर बहुत तेजी से विकसित और चर्चित हुआ है। इस क्षेत्र के तीव्र विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी कल्पना शक्ति, समयबद्ध योजना और धरातल पर होने वाले कामों के बीच अगर सही समन्वय और तालमेल न हो तो भी कोई क्षेत्र तेजी से प्रगति नहीं कर सकता। मीरा-भाईंदर की राजनीति में किसी धूमकेतु की तरह बहुत तेजी से उभरे पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता के सफल कार्यकाल को लोग आज भी याद करते हैं। एक साधारण नगर सेवक से विधानसभा तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है। इसी तरह उनका एक छोटे से व्यापारी से बहुत बड़ा व्यवसायी बनना भी सबको हैरत में डालता है। फर्श से अर्श तक की उनकी यह जीवन यात्रा अनेक लोगों के लिए बहुत प्रेरणादायी है। “कन्यादान पत्रिका” ने उनसे इस बारे में अधिक जानने के लिए एक मुलाकात की। पेश है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश.
सुखी और आनंददायक जीवन की कल्पना हर कोई करता है लेकिन धरातल पर वास्तविक जिंदगी कुछ और ही अनुभव देती है। असल जिंदगी में अनेक तरह की चुनौतियां पेश आती हैं जो पल-पल मनुष्य की परीक्षा लेती हैं। यह किसी व्यक्ति विशेष के बुद्धि-विवेक, इच्छा शक्ति, प्रयास, काम करने के तरीके इत्यादि पर निर्भर करता है कि वह अपनी कल्पना को साकार कर पाएगा या नहीं ? तमाम साधन और गुण होने के बावजूद भी लोग अक्सर अपने इस लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहते हैं। वे लोग बहुत खुशकिस्मत होते हैं जो अपने इस सपने को एक सार्थक रूप दे पाने में सफल होते हैं। ऐसे ही ख़ुशनसीब व्यक्ति हैं विख्यात समाजसेवक बुद्धिमान राजनीतिज्ञ और कुशल व्यवसायी मीरा-भाईंदर के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता जिनके नक्शेकदम पर इस क्षेत्र के बहुत से युवा चलना चाहते हैं। जीवन में अनेक प्रकार के उतार-चढ़ाव के बावजूद भी वे कभी अपने लक्ष्य से भटके नहीं। किसी भी काम के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक व स्पष्ट रहता है। और वे पूरी तैयारी एवं सही योजना के साथ आगे बढ़ते हैं। अपने हितों की सुरक्षा और समाज के भले के लिए किए जाने वाले कार्यों के बीच आपने जो संतुलन बनाए रखा है वो अद्भुत व अविश्वसनीय है। उनकी यही विशेषता उन्हें दूसरों से अलग एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है ।
मेहता जी मूलतः राजस्थान के रहने वाले हैं जहां की माटी से संघर्षशील, कर्मठ और साहसी लोग निकलते हैं। चालीस वर्ष पहले आपका परिवार मुंबई आया था।

आपके पिता स्व. लालचंद जी मेहता व्यवसायी थे, शुरुआत में यहां उनकी किराने की दुकान हुआ करती थी। जब उनका देहांत हुआ तो पिताजी के व्यवसाय को आपने आगे बढ़ाया। कुछ समय पश्चात आपने व्यवसाय बदला और गाड़ियों का कारोबार शुरू किया। फिर भवन निर्माण के क्षेत्र में उतरे और इसमें उन्होंने सफलता की कई नए आयाम स्थापित किए। वर्तमान समय में आपके स्कूल, हॉस्पिटल और क्लब हैं जिनका संचालन आप बहुत ही कुशलतापूर्वक कर रहे हैं।
नब्बे के दशक में आपने सक्रिय राजनीति कदम रखा। 1997 में आपने नगर परिषद का चुनाव लड़ा लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाए। 2002 में मीरा-भाईंदर महानगरपालिका का गठन हुआ, आपने नगर सेवक का चुनाव लड़ा और अपक्ष के लिए चुनकर आए। राजनीति में उनकी सफलताओं का सिलसिला यहीं थमा नहीं और वे मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के मेयर बने। आपके इस कार्यकाल में सही मायनों में इस क्षेत्र की काया पलट हुई और यह सिलसिला आगे बढ़ा, जब आप मीरा-भाईंदर की 145 विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक चुने गए। आपके इस कार्यकाल ने उन्हें एक ऐसे विकास पुरूष का दर्जा दिया जो इस क्षेत्र की तरक्की के लिए कुछ भी करने को हर दम तैयार रहता है। आपकी यह लोकप्रियता कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं हुई और वे उनके खिलाफ षड़यंत्र रचने लगे। मेहता जी हमेशा प्रचार से अधिक अपने काम पर ध्यान देते आए हैं इसलिए कुछ लोगों ने उनके खिलाफ दुष्प्रचार करना आरंभ कर दिया। आपकी शुरू से सोच रही है कि सिर्फ कर्म करो और फल की चिंता न करो लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में उनका यह फॉर्मूला गलत साबित हो गया। जब महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव हुए तो आप अपने काम को लेकर पूरी तरह से बेफिक्र थे लेकिन षड़यंत्रकारी पूरी तरह से चौकन्ने। इसका नतीजा यह हुआ कि स्थानीय लोग चुनाव के दौरान षड़यंत्रकारियों की बातों में आ गए जिसके कारण उन्हें इस विधानसभा में हार झेलनी पड़ी। मेहता जी का कहना है कि अभी कुछ ही समय गुजरा है और सच सबके सामने आने लगा है। लोग को इस सच्चाई का अहसास होने लगा है कि चुनाव के दौरान जो माहौल बनाया गया था वो गलत था जबकि सच्चाई कुछ और थी। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने दूसरे लोगों की तरह अपने काम का ढिंढोरा नहीं पीटा शायद यही उनकी गलती थी। वैसे अब लोगों को उनक काम याद आ रहे हैं.. जैसे मेट्रो के काम की शुरुआत, पानी की समस्या दूर करना, सीमेंटेड सड़कों की शुरुआत करना इत्यादि अनेक काम उस कार्यकाल में हुए थे। यह सच है कि पानी में कुछ भी फेंको तो एक दिन सबके सामने आता ही है.. आज मीरा-भाईंदर में यही हो रहा है।

जब वे राजनीति में आए थे तो किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी की विचारधारा का उन पर कोई प्रभाव नहीं था। लेकिन जब वह भारतीय जनता पार्टी में आए तो स्व. गोपीनाथ मुंडे जी के विचारों का उन पर काफी प्रभाव पड़ा और वे उनके प्रेरणास्रोत बने। वर्तमान में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस जी को अपना आइडियल मानते हैं। आपका मानना है कि समाज में बहुत तरह की समस्याएं मौजूद हैं और कोई भी सरकार सभी समस्याओं को हल नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में सामाजिक संस्थाओं का रोल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। “वर्तमान समय में देश का आधा काम तो हमारी सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से होता है।” आज देश की सभी सामाजिक संस्थाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। सबके अपने अलग लक्ष्य हैं और अलग काम हैं जिन्हें पूरा करने का वे प्रयास करते हैं। कोई मेडिकल कैम्प लगाता है, कोई भूखों को भोजन करता है और कोई शेल्टर होम खोलता है.. इसी तरह से सब संस्थाएं अपनी क्षमता के अनुरूप जरूरतमंद लोगों की मदद करती हैं। अगर देश का हर व्यक्ति दूसरों की मदद करने की बात मन में ठान ले तो 130 करोड़ लोगों के देश में 65 करोड़ लोगों मदद तो ऐसे ही हो जाएगी। लेकिन हर व्यक्ति अपना सोचता है दूसरों के बारे में वह सोचता नहीं। अगर हर सक्षम व्यक्ति एक परिवार की मदद की जिम्मेदारी उठाए तो कोई व्यक्ति परेशानी में नहीं रहेगा। समय के साथ समाज में नई-नई समस्याएं भी पैदा होती हैं जैसे कि मुंबई जैसे महानगर में लोगों को आर्थिक परेशानी या रोजगार की समस्या अधिक होती है। अगर लोग यह सोच लें कि उन्हें औरों के लिए भी जीना है, जरूरतमंद लोगों की मदद करनी है तो सभी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
वर्तमान पीढ़ी के बारे में आपका कहना है कि वह बहुत तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है उसमें स्थिरता की कमी है जिसकी उन्हें बहुत जरूरत है। वे सिर्फ आज का ही विचार न करें आने वाले कल का भी विचार करें और गुजरे हुए कल के बारे में भी आत्मचिंतन करें। किसी भी कार्य में चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हो, परिवार से जुड़ा हो या व्यवसाय से जुड़ा हो स्थिरता का होना बहुत जरूरी है। पहले लोग पारिवारिक जीवन अधिक जीते थे, अब सब अपना-अपना जीवन जीने की कोशिश करते हैं। परिवार की एकजुटता में बहुत बड़ी शक्ति होती है। परिवार आपके साथ है तो आप बहुत सारी मुश्किलों को आसानी से झेल सकते हैं। अपने अगर साथ नहीं हैं तो जीवन में बहुत सारी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं।
कोरोना काल में आपने देखा कि बहुत सारी जगहें हैं जहां सरकार या यंत्रणा पहुंच नहीं पा रही है, वहां आपने “बीफॉरयू संस्था” के माध्यम से अपनी एक टीम का निर्माण किया। कुछ जरूरतें ऐसी थीं जो लोगों की उन्होंने पूरी कीं। कुछ ऐसी जानकारियां थीं जो उन्होंने सरकार और महानगरपालिका तक पहुंचाई। लोगों की बहुत सी समस्याओं का निवारण किया, उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि कोरोना काल में उनकी टीम ने बहुत अच्छा काम किया।

“राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” द्वारा आयोजित “सर्व जातीय विवाह महोत्सव” की वे सराहना करते हुए कहते हैं कि धर्मेंद्र शर्मा जी यह आयोजन बहुत दिल से करते हैं, जैसे इनके परिवार में ही कोई शादी हो रही है। वे इसे महज औपचारिकता निभाने मात्र के लिए नहीं करते। वे इसके डिटेल में जाते हैं. पूरे उत्साहपूर्वक सारा काम करते हैं.. ब-कायदा घर-घर जाकर शादी की पत्रिका देते हैं। आज भी बहुत सारे ऐसे परिवार हैं जो अपनी कन्या की शादी धूमधाम से करना चाहते हैं लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती। यह संस्था ऐसे परिवारों की बहुत बड़ी मदद कर रही है, जहां सभी जोड़ों का अलग-अलग पंडाल में सारे रीति-रिवाजों के साथ भव्य तरीके से विवाह सम्पन्न करवाया जाता है। सभी दूल्हा-दुल्हन के परिवारों को वहा आमंत्रित किया जाता है। वहां पर आकर किसी को ऐसा नहीं लगता है कि उनका विवाह किसी सार्वजनिक संस्था द्वारा करवाया जा रहा है, उन्हें वहां अपने घर में होने वाले भव्य विवाह जैसा अहसास होता है। संस्था यह काम बहुत अच्छे तरीके से कर रही है इसके लिए वह बधाई की पात्र है। जब किसी काम की शुरुआत अच्छी हो तो उसका अंत भी बहुत अच्छा होता है और इस कार्यक्रम की शुरुआत बहुत अच्छी हुई है। इस संस्था के भाव अच्छे हैं.. विचार अच्छे हैं और यहां पर सब सच्चे दिल से काम करते हैं। मैं आप सबको इस अभियान के अच्छे भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।
संस्था के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा जी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। अच्छे लोग ही समाज में अच्छा काम करते हैं। वे भी सामाजिक कार्य से जुड़े हैं और मैं भी जुड़ा हूं इसीलिए हमारी मुलाकात हुई। उन्होंने अपनी पूरी टीम को एक सूत्र में बांधकर रखा हुआ है। जब संस्था में अच्छा काम होता है तभी लोग उससे जुड़े रहते हैं वर्ना लोग आते हैं और चले जाते हैं। “कन्यादान पत्रिका” का प्रकाशन इस अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा जिससे संस्था को सहयोग देने वाले सभी लोगों के बारे में जानकारी होती है। संस्था की सभी गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। बहुत से लोग जो विवाह कार्यक्रम में नहीं आ पाते हैं उन्हें इसके माध्यम से पूरी जानकारी मिल जाती है और लोग इससे प्रेरित होते हैं कि उन्हें भी जीवन में कुछ करना चाहिए।
संस्था ने आगामी पांच सालों में देश भर में “पांच हजार विवाह” करने और “कन्यादान आश्रालय“ बनाने का जो संकल्प लिया है उसके लिए मेहता जी ने अपना हर संभव सहयोग देने का वादा किया है और कहा है कि मीरा-भाईंदर निवासी होने के नाते उन्हें अभिमान होगा कि उनके शहर में ऐसा आश्रालय मौजूद है । धर्मेंद्र शर्मा जी की सोच अच्छी है और वे मेहनती हैं। अगर उन्होंने इस बारे में कोई योजना बनाई है तो इससे वे यश प्राप्त करेंगे ऐसा मेरा मानना है।