कन्यादान परिवार में लोग निःस्वार्थ भाव से जुड़े हैं
मोसेस चिन्नप्पा
(MOSES CHINAPPA)

समस्त जीवों के प्रति दया भावना ही मनुष्यता की पहचान है। जीवदया को हर धर्म में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है ताकि मनुष्य प्रत्येक जीव की संवेदनाओं को समझे और उससे प्यार भरा व्यवहार करे । सुप्रसिद्ध पशु प्रेमी, समाजसेवी, शिवसैनिक और टॉप मीडियाकर्मी “मोसेस चिनप्पा” उन चुनिन्दा ख़ुशनसीब लोगों में से एक हैं जिन्हें बहुत कम उम्र में ही मानवीय संवेदनाओं का अहसास हो जाता है। बीफॉरयू के नेशनल हेड के महत्वपूर्ण पद पर कार्य करते हुए भी उनकी संवेदनाएं हमेशा लाचार पशु-पक्षियों की मदद के लिए व्याकुल रहती हैं। बचपन में माता-पिता से उन्हें ऐसे उत्तम संस्कार मिले जिसने उन्हें परपीड़ा का अहसास दिलाया और उनकी मदद के लिए प्रेरित किया। मनुष्य हो या कोई और पीड़ित जीव वे सदा उनकी मदद के लिए तत्पर रहते हैं।
कोरोना काल में जब हर इंसान लॉकडाउन के कारण अपने घरों बंद था तब सड़क पर घूमने वाले जानवर कई दिनों से भूखे-प्यासे थे तो उन्होंने सैंकड़ों जानवरों के खाने-पीने का इंतजाम लंबे समय तक अपने दम पर किया । आज भी वे कई जानवरों को आपने घर पर रखकर उनकी सेवा कर रहे हैं। इस मुश्किल समय में आपने करीब साढ़े तीन सौ परिवारों के खाने-पीने, चिकित्सा सहायता व अन्य अवश्य चीजों की व्यवस्था की । इस दौरान उन्होंने तीन एम्बुलेंस को हायर कर बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। बाहर गांव जाने वाले लोगों को उस समय डाक्यूमेंटस जेरोक्स की परेशानी थी तो उन्होंने उनके लिए जेरोक्स मशीन की व्यवस्था की सब्जियों के दाम जब आसमान छू रहे थे तब आपने अपनी पार्टी शिवसेना के साथ मिलकर लोगों को सस्ती सब्जियां उपलब्ध करवाई। हजारों फेस मास्क और सेनेटाइजर्स का प्रबंध किया ताकि लोग कोरोना महामारी के दौरान सुरक्षित रह सकें। बिल्डिंग सोसाइटियों में जाकर काउंसलिंग कर उन्होंने उन मध्यमवर्गीय परिवारों की मदद की जो शर्म के मारे किसी से मदद की गुहार नहीं लगा पा रहे थे। आपने उनके लिए खाने-पीने की इंतजाम किया और सोसाइटियों के झगड़े निपटाए क्योंकि लोग लंबे समय तक बंधन में रहने को तैयार नहीं थे ऐसे लोगों को काउंसलिंग के जरिए महामारी की गंभीरता के बारे में समझाया ।
आपका मानना है कि भारत में शादी ऐसी आवश्यक रस्म है। जिसमें घर के सभी सदस्य व रिश्तेदार काफी भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं ताकि वे सबको संतुष्ट कर सकें लेकिन आर्थिक समस्या के कारण कई बार वे ऐसा नहीं कर पाते। ‘कन्यादान’ परिवार ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए बहुत अच्छा काम कर रहा है। “राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” एक ऐसी संस्था है जिसमें ऐसे लोग जुड़े हुए हैं जिनका अपना कोई निजी स्वार्थ नहीं है। वे सिर्फ सेवा की भावना से इस अभियान को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं ताकि जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके। संस्था के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा जी अपनी टीम के साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और उन्हें ऐसे ही कार्यक्रम अन्य शहरों व दूसरे प्रदेशों में भी आयोजित करने चाहिए। “कन्यादान” पत्रिका सबसे हटकर है इसे हर बिल्डिंग सोसायटी तक पहुंचना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।
"कन्यादान" पत्रिका लोगों के मर्म को स्पर्श करती है....
धीरेंद्र मणी त्रिपाठी

हर मनुष्य अच्छा जीवन जीने की कल्पनाएं करता है और अपनी बुद्धि-विवेक के अनुसार उन कल्पनाओं को हकीकत में बदलने की कोशिश भी करता है। वह लोग बहुत ख़ुशकिस्मत होते हैं जिन्हें मन चाहे क्षेत्र में कार्य करने का मौका मिल पाता है।
सुप्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवक धीरेंद्र मणी त्रिपाठी इन्हीं खुशनसीब लोगों में से हैं जिन्होंने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष करते हुए कई क्षेत्रों में अपना व परिवार का नाम रोशन किया है। पिताजी श्री देव प्रताप त्रिपाठी जी सेना में थे और आपने बारहवीं पास करने के पहले ही 1999 में इंडियन नेवी ज्वॉइन कर ली थी.. फिर 2003 में मर्चेंट नेवी में जॉब शिफ्ट हो गए और 2012 में यह जॉब छोड़ने से पहले ही आपने अपना इंपोर्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस प्लान कर लिया था। इस दौरान आपने “त्रिपाठी इंटरप्राइजेज” नामक कंपनी की स्थापना कर ली थी। इस कंपनी के तहत आपने सबसे पहले दुबई से कारपेट एक्सपोर्ट का व्यवसाय आरंभ किया फिर रेडीमेड गारमेंट्स और लेदर के व्यवसाय में भी कदम रखा। आपने दुबई को अपना बिजनेस सेंटर बनाया। आपकी मेहनत रंग लाई और उनका यह व्यवसाय प्रगति करता गया। इस जीवनकाल में आपने चौबीस देशों की यात्राएं की हैं। भारत में आप बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन से जुड़े और इस क्षेत्र में भी ख़ूब नाम कमाया। आप शुरू से ही क्रिएटिव माइंड के व्यक्ति रहे हैं इसलिए आपने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा और आज यह सभी व्यवसाय दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं।
वर्तमान में आप लखनऊ में रहते हैं और प्रतापगढ़ के मूल निवासी हैं। मुंबई के उपनगर कल्याण में भी आपका घर है। माता-पिता को अपने जीवन का प्रेरणास्रोत मानने वाले त्रिपाठी जी को बचपन से ही कुछ ऐसे संस्कार मिले हैं कि उनका रूझान बेहद कम उम्र से ही परोपकार और समाजसेवा के प्रति अधिक रहा। जब आप दसवीं कक्षा के छात्र थे, उस समय आपने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक वृद्ध को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई थी, तब सड़क पर उन्हें कोई हाथ लगाने को भी तैयार नहीं था। उस वक्त उनके इस साहस की प्रशंसा पुलिस ऑफीसर और मीडिया ने भी की थी।
जनसेवा का यह जज्बा आज भी उनमें उसी तरह बरकरार है। आपने कोरोना संकट काल में भी जरूरतमंद लोगों की बहुत मदद की है, उन्हें राशन, सब्जी व अन्य खाने-पीने का सामान देने के साथ ही वे उनके अत्यावश्यक खर्चों के लिए पैसे देकर भी लोगों के मददगार बने। आपके दादा जी कहा करते थे कि नेकी कर और दरिया में डाल’ उनके इसी कथन को चरितार्थ करते हुए आप हमेशा निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद करते हैं और उनकी सेवा का कोई मौका खाली नहीं जाने देते। आपका बरसों से सपना रहा है वृद्ध आश्रम खोलने का जिसमें बेसहारा बुजुर्गों को पनाह मिले और वो अपनी बाकी बची हुई जिंदगी अच्छी तरह से गुजार सकें। आपके पिताजी ने गांव में गरीब घर की एक लड़की की शादी का तकरीबन पूरा खर्च उठाकर उसके परिवार की मदद की थी, इस बात उन्हें काफी प्रेरणा मिली। जब आपको प्रियंका दुबे जी के माध्यम से ‘कन्यादान’ अभियान के बारे जानकारी मिली तो वे तुरंत इससे जुड़ने के लिए तैयार हो गए। जब उन्होंने भव्य विवाह महोत्सव कार्यक्रम देखा तो उन्हें बहुत ख़ुशी मिली और वे इस अभियान में सक्रिय रूप से अपना योगदान देने के लिए तत्पर हो गए ।
“राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” संस्था के संस्थापक अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा जी को आप एक बेहद कुशल संचालक मानते हैं जो सारा कार्य भार ख़ुद संभालने के बावजूद अपनी टीम के सदस्यों को सदैव आगे रखकर उनमें काम करने का हौसला बनाए रखते हैं। उनकी यही विनम्रता सबके मन को छू जाती है और इसीलिए लोग इतनी बड़ी तादाद में इस अभियान से जुड़ते चले जा रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी के बारे में आपका मानना है कि वह बहुत टैलेंटेड है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वे उनमें संस्कारों के कमी देख रहे हैं जिसके लिए हमारा समाज भी जिम्मेदार है। इसे ठीक करने के लिए उनमें जागरूकता लाने की ज़रूरत है। दुनिया के अनेक देश घूमने के बाद आपने अनुभव किया है कि भारत जैसा देश पूरी दुनिया कहीं नहीं है जो अपनी अनेक कमियों के बावजूद बुरे समय में हमेशा एकजुट होकर दुनिया के सामने आता है। वर्तमान में देश बहुत अच्छी स्थिति में है और सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आपका कहना है कि ‘कन्यादान’ पत्रिका इस अभियान को आगे बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है उन्होंने स्वयं भी इस अभियान के बारे में इसी पत्रिका के माध्यम से बहुत कुछ जाना और समझा है उसमें दी गई जानकारी लोगों के मर्म को स्पर्श करती है। यह अभियान इसी तरह आगे बढ़ता रहे और अन्य नगरों व प्रान्तों में फेले, वे इसकी सफलता के लिए कामना करते हैं।