विवाह कार्यक्रमों में सादगी अनेक कन्याओं को मिलेगा जीवनदान
‘विवाह’ स्त्री-पुरुष की एक नई जिंदगी की प्यारभरी शुरूआत है, जिसे सिर्फ धन-दौलत की चकाचौंध से सुखमय व आनंददायी नहीं बनाया जा सकता। ऐसी अनेक भव्यतम शादियां इतिहास के पन्नों में दफन हैं जिनमें रिकॉर्ड तोड़ पैसा उड़ाया गया था लेकिन उनका हश्र बहुत गमजदा तरीके से हुआ। ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स और लेडी डायना का ऐतिहासिक खर्चीला विवाह समारोह किसे याद नहीं, जिसमें बेशुमार धन खर्च किया गया था लेकिन उसका अंत कितना दुखद हुआ। इस विश्व विख्यात जोड़ी का टूटना और लेडी डायना की अपने प्रेमी के साथ हुई दुखद मौत ने कभी सारी दुनिया को हिला दिया था। दुनिया के धनवानों के लिए वह बड़ा उदाहरण है कि सिर्फ दौलत की चकाचौंध में विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को सफल व सुखी जीवन में तब्दील नहीं किया जा सकता। ऐसी अनेक घटनाओं के बावजूद लोग इस प्यार भी रिश्ते को दौलत की तराजू में तोलन की कोशिश करते हैं।
हमारे देश में दुनिया भर में आदर्शता का ढोंग करने वाले नेता, सादगी का उपदेश देने वाले अभिनेता और चंद पैसों के लिए गरीबों की चमड़ी नोचने वाले व्यवसायी जब अपने लड़के-लड़कियों की शादी में झूठी शान दिखाने के लिए जिस बेरहमी से धन की बर्बादी करते हुए नज़र आते हैं उसे देख लगता है कि जैसे उनके लिए यह जिंदगी सिर्फ दो-चार दिनों की है। जबकि ज़िंदगी की हक़ीकत इसके ठीक उलट है। शादीशुदा जीवन लंबा सफर हम तभी आनंद व सुख-चैन से गुजार सकते हैं जब इस रिश्ते में प्यार, आपसी समझबूझ और विश्वास होगा। दौलत की चमक तो पति-पत्नी के इस रिश्ते की सच्चाई को कभी सही ढंग से महसूस ही नहीं करने देती। यही कारण है कि धनवानों की शादियों की असफलता का प्रतिशत हमारे समाज में इतना अधिक है। इसके बावजूद भी लोग सबक सीखने को तैयार नहीं, आज भी महंगी शादियों का दिखावा बदस्तूर पूरे देश में निरंतर जारी है।
सैंकड़ों करोड़ की मंहगी शादियां:
यूं तो कहने को भारत में गरीबों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है लेकिन इन गरीबों को लूटकर अमीर बने देश के इन मुठ्ठीभर लोगों की शादी में फिजूल खर्ची के किस्से दुनियाभर में मशहूर हैं। आर्थिक घोटाले में बरसों से जेल में बंद मशहूर व्यवसायी सुब्रतो राय ने कभी अपने बेटे की शादी में 552 करोड़ रूपये खर्च किए थे। इस शादी में बड़ी तादाद में खाने की बर्बादी हुई थी। शादी के बाद बचा हुआ खाना डेढ़ लाख भिखारियों में बांटने के बावजूद भी बहुत सारा खाना फेंकना पड़ा था। इसी तरह राजनेता जर्नादन रेड्डी की बेटी ब्राह्मणी की शादी में 500 करोड़ रूपये से अधिक धन खर्च गए थे। उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल की बेटी वनीशा की शादी में 220 करोड़ रूपये खर्च किए गए थे। केरल के नेता रवि पिल्लई की बेटी आरथी और हरियाणा के नेता सुखबीर सिंह की बेटी योगिता की शादियां भी सैकड़ों करोड़ में की मानी जाती हैं। तामिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने दत्तक पुत्र की शादी में इसी तरह सैकड़ों करोड़ रूपये बहाये थे, जबकि उन पर भ्रष्टाचार के अनेक मामले चल रहे थे। हाल में दक्षिण के अभिनेता नागार्जुन की बेटी की शादी हो या क्रिकेटर विराट कोहली व अभिनेत्री अनुष्का की शाही शादी इसमें बेशुमार धन खर्च किया गया था। इन सभी खर्चीली शादियों में ख़ास बात यह थी कि हमें दिनरात आदर्शवाद का पाठ पढ़ाने वाले देश के अनेक दिग्गज नेता धन के इस सरेआम अपव्यय के साक्षी बने थे और उन्होंने इन्हें सार्वजनिक तौर पर इस कारनामे के लिए बधाइयां दी थीं।

धनवानों की मंहगी शादियों से कम आय वर्ग पर आ जाता है आर्थिक दबाव:
धनवानों की शादियों में दिखावा अनेक ऐसी गैर-जरूरी रस्मों-रिवाजों को जन्म देता है जो कम आय वाले वर्ग के लोगों पर बहुत भारी पड़ता है। चाहे-अनचाहे उन्हें ये नई रस्में या यूं कहें चोंचले छोटे या बड़े रूप में निभाने ही पड़ते हैं, जिस वजह से उनकी शादियां का बजट बढ़ जाता है। वर पक्ष वधु पक्ष पर उन्हें पूरा करने दबाव डालते हैं, जिसे उन्हें किसी भी तरह पूरा करना पड़ता है। इस कारण अक्सर वे कर्ज़दार हो जाते हैं और उनकी जिंदगी कष्टमयी हो जाती है। शादी का उद्देश्य घरों को आबाद करना होना चाहिए ना कि उसे बर्बाद करना ? धन जीवन की जरूरत है जिसे आवश्यक कार्यों में खर्च करना चाहिए ना कि शादो-चार दिन के कार्यक्रम में उसे बर्बाद कर बाकी जीवन के लिए मुसीबतों को आमंत्रण देना चाहिए।

आदर्श विवाह की अनिवार्यता का बने कानूनः
विवाह कार्यक्रमों में अपव्यय रोकने के लिए आज देशभर में अनेक सामाजिक संस्थाएं लोगों में जागरूकता के लिए बड़े-बड़े अभियान चला रही हैं। सरकारें भी अपने स्तर पर अनेक तरह के प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम चलाती रहती हैं। लेकिन सरकार में बैठ देश के अनेक नेतागण न सिर्फ स्वयं को विवाह की फिजूल खर्ची से अलग कर पाते हैं और न ही लोगों को इसके लिए प्रेरित करते हैं। हमारी सरकार में बैठे लोगों के इस ढीले रवैये से समाज का भला होने वाला नहीं है। शादी में फिजूल खर्च को बंद करने के लिए जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों को दृढ़ निश्चय के साथ इस बुराई के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए। यह बुरी परंपरा तभी समाप्त हो सकती है जब देश में ‘अनिर्वाय आदर्श विवाह’ का कानून बनाया जाय और उसे कड़ाई से लागू किया जाय। इस अनिर्वाय आदर्श विवाह का पैमान क्या हो यह एक राष्ट्रव्यापी बहस और बड़े विशेषज्ञों की राय के बाद तय किया जा सकता है। जिस देश और समाज में ऐसी समस्याओं के खिलाफ लड़ने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो वही इसमें सफल हो सकता है। अगर हमारा देश इस प्रयास में सफल होता है। तो राष्ट्र की अनेक कन्याओं को जीवनदान मिलेगा और उनके घरवालों का जीवन सुखमय होगा ।