बेसहारा लड़कियों का आसरा - कन्यादान आश्रालय
ऐसा माना जाता है कि इस संसार में रहनेवाला हर व्यक्ति एक-दूसरे से किसी न किसी तरह से आपस में जुड़ा हुआ है। यह बात सच है लेकिन इस सच्चाई के बावजूद इसी दुनिया में कुछ लोग एक दम अकेले या बेसहारा हैं. आखिर क्यों ? और अगर वो बेसहारा कोई लड़की हो तो इस बेरहम दुनिया में उसके सामने किस तरह की कठिन चुनौतियां पेश आती होंगी इसकी कल्पना करते ही मन में सिहरन पैदा हो जाती है..? जब यह सोचकर हमारा यह हाल हो जाता है तो फिर उस लड़की की क्या मनोस्थिति होती होगी जो इन हालात से गुजरती है…? लेकिन यह भी सच है कि इसी बेरहम दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें दूसरों की तकलीफों का न सिर्फ पूरा अहसास होता है बल्कि वे उनकी तकलीफें कम करने की हर मुमकिन कोशिश भी करते हैं। ऐसे ही चुनिंदा लोगों से मिलकर निर्माण हुआ है “राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” का जो अभी तक गरीब और जरूरतमंद लोगों की कन्याओं का भव्य विवाह करवाने की पूरी जिम्मेदारी उठाने के लिए जाना जाता रहा है।
..लेकिन अब इस संस्था ने अपनी “पंचवर्षीय योजना” के तहत कई तरह के जनसेवी कार्य करने का बीड़ा उठाया है। इस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत संस्था हमारे देश की बेसहारा बेटियों के लिए “कन्यादान आश्रालय” का निर्माण करने जा रही है। जिसमें इन लड़कियों के रहने-खाने की व्यवस्था के साथ-साथ उनकी पढ़ाई-लिखाई, रोजगार ट्रेनिंग से लेकर उन्हें रोजगार दिलवाने की भी व्यवस्था यहां होगी। इन लड़कियों के आत्मनिर्भर होने के बाद भी संस्था इनके विवाह तक की समस्त जिम्मेदारियां खुद उठाएगी।

हमारे घर में एक लड़की भी हो तो उसके अच्छे भविष्य को लेकर हम अनेक प्रकार की चिंताओं से घिरे रहते हैं। जब एक कन्या के लिए हमारे ऊपर इतनी सारी जिम्मेदारियां आ खड़ी होती हैं जिससे अक्सर हम परेशान हो जाते हैं तो फिर सोचिए “राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” को इतनी सारी बेसहारा लड़कियों की जिम्मेदारी उठाने में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा…? लेकिन अगर मन में कुछ बड़ा कार्य करने की तमन्ना हो और इरादे नेक हों तो फिर कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती । संस्था के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा जी के बुलंद इरादों से तो यही बात जाहिर होती है। उनका कहना है कि जब हमारे मन में सामूहिक विवाह का आयोजन करने का विचार आया था तो उस समय भी ऐसे अनेक प्रश्न उठे थे कि इतने बड़े तामझाम के साथ भव्य विवाह समारोह का आयोजन कैसे होगा ? लेकिन हमारी दृढ इच्छाशक्ति, कार्यकर्ताओं की असीम मेहनत और लोगों के सहयोग का नतीजा है कि हम लगातार चौथे साल भव्य “सर्व जातीय सामूहिक विवाह महोत्सव” का आयोजन करने जा रहे हैं। कोरोना काल में भी हम रुके नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि “कन्यादान आश्रालय” की स्थापना और संचालन की चुनौती भी इससे बहुत अलग नहीं है। हमारे सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में इसे लेकर काफी जोश और जज्बा दिखाई दे रहा है। अब वो दिन दूर नहीं है जब मीरा-भाईंदर में सबके सहयोग से एक सर्व सुविधा युक्त “कन्यादान आश्रालय” स्थापित होगा। धर्मेन्द्र जी हमारी राज्य सरकार और प्रशासन में बैठे अधिकारियों से यह उम्मीद करते हैं। कि वे इस नेक कार्य के लिए हमारी संस्था का सहयोग करते हुए “कन्यादान आश्रालय” का भवन निर्माण करने के लिए हमें उचित जगह पर अतिशीघ्र जमीन का आवंटन करें।
ऐसा माना जाता है कि इस संसार में रहनेवाला हर व्यक्ति एक-दूसरे से किसी न किसी तरह से आपस में जुड़ा हुआ है। यह बात सच है लेकिन इस सच्चाई के बावजूद इसी दुनिया में कुछ लोग एक दम अकेले या बेसहारा हैं.. आखिर क्यों ?
संस्था की तैयारी पूरी है कि वह बेसहारा लड़कियों के लिए एक ऐसे आदर्श व सुरक्षित स्थल का निर्माण करे जहां रहने वाली बच्चियां स्वयं को अपने घर जैसा महसूस कर सकें और एक सुखी भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें। इसके साथ ही संस्था दान दाताओं से भी यह उम्मीद करती है कि वे पिछले कार्यक्रमों की तरह इस कार्य के लिए भी दिल खोलकर सहयोग करें। इस देश की कन्याएं हमारे देश का भविष्य हैं। वह ना सिर्फ एक बेटी, बहन, पत्नी, मां और बहू के रूप में किसी के घर को संवार सकती हैं बल्कि एक बिजनेस वूमन, सम्मानित पेशेवर महिला, अधिकारी या कर्मचारी के रूप में भी अपना सराहनीय योगदान दे सकती हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ आप सबका थोड़ा सा सहयोग और अपनापन चाहिए. बस ।

“मेरा मायका” बनेगा बेसहारा महिलाओं का आशियाना
हमारा देश सदियों सदी से महिलाओं को अपने समाज सम्मानीय दर्जा देता आया है। यहां उनकी समस्याओं और एक जरूरतों का विशेष ख़याल रखा जाता रहा है। सनातन धर्म के अनुयायी तो महिलाओं को दुर्गा और लक्ष्मी का रूप मानते रहे हैं। अन्य धर्मों और और संप्रदायों में भी उन्हें कुछ न कुछ अतिरिक्त सुविधाएं व सम्मान दिये जाने की गौरवशाली परंपरा हमारे समाज में रही है। … फिर पिछले कुछ दशकों से ऐसा क्या हो गया जो आए दिन हम महिलाओं की प्रताड़ना और बदसलूकी की अनगिनत घटनाओं को देखने या सुनने के बाद भी खामोश बने उन्हें यूंही बेसहारा छोड़ देते हैं। सरकार व सामाजिक संस्थाओं ने महिलाओं के उत्थान की अनेक योजनाएं चलाई हुई हैं इसके बावजूद हमारे समाज में घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा व बलात्कार से पीड़ित महिलाएं और तलाक शुदा व विधवा महिलाएं बड़ी तादाद में अपनी लड़ाई अकेले लड़ने पर मजबूर हैं ? .. इनमें से अनेक महिलाएं बेघर, बेसहारा और बेरोजगार हैं जो बड़ी उम्मीद से किसी प्रकार की सहायता मिलने की बाट जो रही हैं लेकिन अपनी जिंदगी की आपाधापी में उलझा हमारे समाज का सक्षम व समृद्ध तबका उनकी लगातार अनदेखी कर रहा है ? ऐसी हालात की मारी और मजबूर महिलाएं भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर देश के विकास में उतना ही योगदान दे सकती हैं जितना कि बाकी अन्य लोगों दे पा रहे हैं। बस, ज़रूरत है उनकी लाचरी । पर समुचित ध्यान देने और उनकी हर संभव सहायता करने की ।

“मेरा मायका” में होगा सभी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम :
“राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” ऐसी पीड़ित बेसहारा महिलाओं को उचित संरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था ने उनके पुनर्वसन लिए “मेरा मायका” नामक एक बड़ी योजना बनाई है जो उसकी महत्वाकांक्षी “पंचवर्षीय जनसेवा योजना” का अहम् हिस्सा है। इस योजना के अंतर्गत संस्था घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा व अन्य किसी तरह से सताई हुई महिलाओं, तलाकशुदा व विधवा महिलाओं जिनका कोई सहारा नहीं है उन्हें संरक्षण देने के लिए “मेरा मायका” आश्रालय बनाने जा रही है। इस योजना के अंतर्गत संस्था एक ऐसे सर्व सुविधायुक्त भवन का निर्माण करेगी जिसमें इन बेसहारा महिलाओं के रहने, खाने-पीने व उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की हर सुविधा का पूरा इंतजाम किया जाएगा। इस भवन में इन महिलाओं को रोजगार प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण | दिया जाएगा और रोजगार हासिल करने में भी हर तरह की सहायता की जाएगी.. साथ ही जो वे महिलाएं यहीं पर रहकर कुछ काम करना चाहती हैं उनके लिए आवश्यक साधनों व संसाधनों की व्यवस्था भी की जाएगी। इनमें से जो महिलाएं पुनः अपना घर बसाना चाहें तो संस्था उनके लिए रिश्ता खोजने और उनका भव्य तरीके से विवाह करने की भी पूरी व्यवस्था करेगी।
यहां सभी महिलाएं को होगा अपने मायके जैसा अनुभव :
“मेरा मायका” आश्रालय में इन बेसहारा महिलाओं की सुरक्षा एवं चिकित्सा सहायता का भी पुख्ता इंतजाम किया जाएगा। संस्था के पदाधिकारी और कर्मचारी इस आश्रालय में ऐसे सुविधायुक्त व सुगम वातावरण का निर्माण करने का पूरा प्रयास करेंगे जिससे यह स्थल इन महिलाओं को अपने मायके यानी पिता के घर की तरह लगे। यहां पर उनके मनोरंजन, ज्ञानवर्धन आदि की समुचित व्यवस्था होगी। यहां उन्हें अपने परिवार जैसा माहौल मिले इसके लिए संस्था के पदाधिकारी व सदस्य समय-समय पर अपने परिवार के साथ यहां आएंगे और उनके साथ महत्वपूर्ण वक्त बिताएंगे। इस दौरान वे इन महिलाओं की समस्याओं के बारे में भी जानकारी लेंगे और उनको दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे।

सबके सहयोग ही यह सपना होगा साकार :
ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा करने के लिए हमारे समाज में रहने वाले सभी लोगों के सहयोग की आवश्यकता होती है। “राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” चाहता है कि समाज के सक्षम व समृद्ध लोग इस योजना को सफल बनाने के लिए आगे आएं और अपनी क्षमता के अनुरूप अधिक से अधिक सहायता करने की कोशिश करें। बूंद-बूंद से घट भरता है उसी प्रकार लोगों के छोटे-बड़े सहयोग से बेसहारा महिलाओं का आशियाना भी बनेगा और उसमें सभी आवश्यक सुविधाओं का इंतजाम भी किया जा सकेगा। संस्था समाज के सभी वर्ग के लोगों से अपील करती है कि वे अपना हर संभव सहयोग दें। इसके दान में दी जाने वाली राशि कम हो या अधिक नकद हो या किसी भी अन्य रूप में हो, वे दिल खोलकर संस्था की सहायता करें।
सरकारी सहायता के बिना कोई भी सामाजिक संस्था इसतरह की योजनाओं को आसानी से सफल नहीं बना सकती। “राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट” महाराष्ट्र सरकार से “मेरा मायका” आश्रालय भवन के लिए मीरा-भाईंदर शहर में उचित व सुरक्षित स्थान पर एक प्लॉट के आवंटन का निवेदन करती हैं। राज्य शासन अगर इस आश्रालय की आवश्यक अनुमति व कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के साथ ही प्लॉट का शीघ्र आवंटन करती है तो यह मीरा-भाईंदर शहर के लोगों के लिए एक बड़ी सौगात होगी।